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Friday, June 18, 2021
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चमोली, उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने के बाद 10 शव मिले, 150 मजदूर लापता

सुरंग में जलस्तर बढ़ा, रेस्क्यू ऑपरेशन रुका. प्रशासन ने अलकनन्दा नदी के किनारे रह रहे लोगों के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है.

अपनी नैसर्गिक खूबसूरती के लिए मशहूर उत्तराखंड रविवार को एक बेहद दर्दनाक हादसे का गवाह बना। उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से बड़ी तबाही हुई है. नंदा देवी नेशनल पार्क के करीब इस ग्लेशियर के फटने की वजह से रैणी गांव के पास ऋषि गंगा तपोवन हाइड्रो प्रोजेक्ट का बांध भी टूट गया.आईटीबीपी के डीजी सुरजीत सिंह देसवाल के मुताबिक चमोली त्रासदी में करीब 150 लोग लापता हैं और अब तक करीब 10 शव बरामद हो चुके हैं.

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम मौके के लिए रवाना हो गई। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से बात की। उन्होंने राज्य को हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया है।

सेना, वायुसेना, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और एसडीआरएफ की टीमें स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत और बचाव का कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा अबतक सात लोगों के शव बरामद हो चुके हैं और 170 लोगों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है। मुख्यमंत्री ने लोगों से पुराने वीडियो शेयर न करने और धैर्य बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने मदद के लिए एक मोबाइल नंबर भी जारी किया है।

डीजीपी अशोक कुमार ने जोशीमठ में पत्रकारों से वार्ता में कहा कि रैणी में 2 पुलिस कर्मी सहित 27 लोग मिसिंग हैं। जबकि तपोवन परियोजना में 150 लोग काम कर रहे थे, जिनमें से 7 लोगों की बॉडी बरामद कर ली गई है। कितने लोग प्रभावित क्षेत्र से मिसिंग हैं, इसका अभी डाटा उपलब्ध नहीं है, तपोवन परियोजना की 900 मीटर लंबी टनल में मलबा घुसा है, उसे खोलने का काम चल रहा है। 150 मीटर तक टनल खोल दी गई है। रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जाएगा। सोमवार तक पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वहीं चमोली जिला प्रशासन ने आठ शव मिलने की पुष्टि की है।

गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि एनडीआरएफ की चार टीमें (करीब 200 कर्मी) हवाईमार्ग से देहरादून पहुंच रही हैं जहां से वो जोशीमठ जाएंगी. वहीं आईटीबीपी और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के कर्मियों को फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए प्रभावित इलाकों में पहुंच चुकी हैं. अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन की टीम राहत और बचाव कार्यों पर निगरानी रखने के साथ नुकसान का जायजा भी ले रही है. वहीं रैणी से लेकर श्रीनगर तक अलकनन्दा के किनारे रह रहे लोगों के लिए चेतावनी जारी की गई है. रैणी में सीमा को जोड़ने वाला मुख्य मोटर मार्ग भी इस बाढ़ की चपेट में आकर बह गया है. दूसरी ओर रैणी से जोशीमठ के बीच धौली गंगा पर नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन की तपोवन विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना के बैराज स्थल के आसपास के इलाके में भी कुछ आवासीय भवन बाढ़ की चपेट में आकर बह गए हैं.

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