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Sunday, June 20, 2021
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59 साल के बाद फरवरी में बनने जा रहा है ग्रहों का विचित्र संयोग।

9 फरवरी की रात जब चंद्रमा का प्रवेश मकर राशि में होगा तो एक ऐसा महासंयोग बनेगा जो दुर्लभ और अद्भुत है। मेदिनी ज्योतिष में कहा गया है कि जब एक राशि में 5 या उससे अधिक ग्रह यदि आकर युति करें तब देश-दुनिया में बड़े भू-राजनीतिक बदलाव आते हैं और इस बदलाव का असर लम्बे समय तक रहता है। सूर्य, गुरु, शनि, चन्द्रमा, बुध तथा शुक्र आदि ग्रह जब एक राशि में आ जाएं तो युद्ध या बड़े जनांदोलन जैसी आपात स्थितियां पैदा होती हैं। ऐसा उल्लेख मेदनीय ज्योतिष की पुस्तकों में मिलता है*।

1962 में आए थे मकर में 7 ग्रह
इससे पहले फरवरी महीने में ही 1962 में मकर राशि में 7 ग्रहों का संयोग हुआ था। इस संयोग का परिणाम यह हुआ था कि दो महाशक्तियों अमेरिका और तत्कालीन सोवियत रूस ‘क्यूबा मिसाइल’ संकट में उलझ गए थे औऱ युद्ध के भय से विश्व राजनीति दो खेमों में बंट गई थी। इससे दशकों तक ‘शीत-युद्ध’ की स्थिति बनी रही। बाद में वर्ष 1979 के सितंबर महीने में सिंह राशि में 5 ग्रहों के योग ने ईरान में इस्लामिक क्रांति से मुस्लिम जगत में उथल-पुथल मचा दी, जिससे अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत में इस्लामिक आतंकवाद का प्रसार हुआ और दशकों तक भारत सहित दुनिया के कई देशों में रक्तपात हुआ। अभी वर्ष 2019 में 26 दिसंबर को धनु राशि में सूर्य ग्रहण के समय 5 ग्रहों के योग ने कोरोना वायरस महामारी और आर्थिक मंदी ने जो तबाही मचा दी है, उससे संपूर्ण विश्व बड़ी मानवीय त्रासदी से गुज़र रहा है। अब 09 फरवरी को रात 08:30 से 12 फरवरी को प्रात: 02:10 तक मकर राशि में बन रही 6 ग्रहों की युति एक बार फिर से देश-दुनिया में बड़े बदलावों का संकेत दे रही है।

भूकंप और ओलावृष्टि के हैं योग
मेदिनी ज्योतिष में मकर राशि को जल राशि तथा पृथ्वी तत्व से प्रभावित माना जाता है। मकर राशि में शनि-गुरु की युति होना तथा उससे केंद्र में मेष राशि में भूमि पुत्र मंगल की स्थिति भूकंपन का योग बनाती है। सूर्य और चंद्रमा 12 फरवरी की अमावस्या के दिन पृथ्वी तत्व की राशि और पृथ्वी तत्व के नवांश में होकर भूकंप का योग बना रहे हैं। इस योग के प्रभाव से 15 दिनों के भीतर पाकिस्तान और उत्तर भारत में भूकंप के झटके महसूस किए जा सकते हैं। 12 फरवरी की अमावस्या के बाद असामान्य वर्षा और ओलावृष्टि का योग भी बन रहा है। उत्तर भारत में ओलावृष्टि से कुछ स्थानों पर फसलों को नुकसान पहुंच सकता है तथा पहाड़ों पर बर्फ पड़ने से सर्दी का मौसम लंबा खींच सकता है।


आचार्य दीपक तेजस्वी

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