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Tuesday, June 15, 2021
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लाउडस्पीकर से अजान इस्लाम का धार्मिक भाग नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

मानव आवाज़ में मस्जिद से दे सकते हैं अजान. बिना ध्वनि प्रदूषण नींद का अधिकार, जीवन के मूल अधिकार में शामिल.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद से अजान पर बडा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का धार्मिक भाग नही है। अजान इस्लाम का धार्मिक भाग है।मानव आवाज में मस्जिदो से अजान दी जा सकती है।
कोर्ट ने कहा है कि ध्वनि प्रदूषण मुक्त नींद का अधिकार जीवन के मूल अधिकारों का हिस्सा है। किसी को भी अपने मूल अधिकारों के लिए दूसरे के मूल अधिकारों का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है।
गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी की अजान पर रोक के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर कोर्ट ने यह फैसला दिया है।
कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश का सभी जिलाधिकारियों से अनुपालन कराने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकान्त गुप्ता तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने अफजाल अंसारी व फर्रूखाबाद के शैयद मोहम्मद फैजल की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है।
मालूम हो कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए देश व्यापीलाक डाउन के कारण सभी प्रकार के आयोजनों एवं एक स्थान पर इकट्ठा होने पर प्रदेश में रोक लगायी गयी है। लाउडस्पीकर बजाने पर भी रोक है।
याची ने लाउडस्पीकर से मस्जिद से रमजान माह में अजान की अनुमति न देने को धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकारों का उल्लंघन करने की मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर हस्तक्षेप करने की मांग की। मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर ली।और सरकार से पक्ष रखने को कहा।
दोनो पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था।
शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने साफ कर दिया है कि लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का धार्मिक भाग नही है। इसलिए स्पीकर से अजान पर रोक सही है।
कोर्ट ने कहा कि जब स्पीकर नही था तो भी अजान होती थी।इसलिए यह नही कह सकते कि स्पीकर से अजान रोकनाअनुच्छेद 25के धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकारों का उल्लंघन है।
कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 स्वस्थ जीवन का अधिकार देती है। वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी को भी दूसरे को जबरन सुनाने का अधिकार नहीं देती है। एक निश्चित ध्वनि से अधिक तेज आवाज बिना अनुमति बजाने की छूट नही है। रात 10बजे से सुबह 6बजे तक स्पीकर की आवाज पर रोक का कानून है।कोर्ट के फैसले है।जिसपर नियंत्रण का सरकार को अधिकार है।

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