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Wednesday, June 23, 2021
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तरकुलहा मंदिर कोरोना प्रोटोकॉल का पूर्ण रूप से किया जाएगा पालन : एडीजी ज़ोन अखिल कुमार

तरकुलहा मंदिर का एडीजी जोन ने किया दर्शन सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा

कोरोना प्रोटोकॉल का पूर्ण रूप से किया जाएगा पालन

एक साथ पांच व्यक्ति ही मंदिर में कर सकेंगे प्रवेश

कतारों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने वारी का करेंगे प्रतीक्षा

गोरखपुर। जनपद के पूर्वी छोर पर स्थित चौरीचौरा तहसील अंतर्गत मां तरकुलहा मंदिर विराजमान हैं जहां प्रतिदिन हजारों भक्तों मां से आशीर्वाद लेने को आते हैं मंगलवार से प्रारंभ होने वाले चैत्र रामनवमी को देखते हुए गोरखपुर जोन के एडीजी अखिल कुमार मंदिर पहुंचकर मां तरकुलहा देवी का आशीर्वाद प्राप्त कर मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था का अपने सहयोगी पुलिस अधीक्षक उत्तरी मनोज कुमार अवस्थी से प्राप्त करते हुए मंदिर परिसर का जायजा लेते हुए आवश्यक दिशा निर्देश अपने मातहतों को देते हुए एडीजी जोन अखिल कुमार ने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल का पूर्ण रूप से मंदिर परिसर में पालन किया जाएगा एक साथ में केवल 5 व्यक्ति ही मंदिर के अंदर कर पाएंगे प्रवेश जिसका पालन हमारे संबंधित अधिकारी व पुलिस के जवान अपने दायित्वों का निर्वहन करेगे यह सभी व्यवस्था आम जनमानस की सुरक्षा को देखते हुए प्रदेश सरकार ने लागू किया है जिसका अनुपालन कराना हमारा व हमारे कर्मचारियों का उत्तरदायित्व कर्तव्य है आपको बताते चलें कि हर साल रामनवमी से लगता है मेेला, इस देवी मां के मंदिर में आजादी के दीवाने बलि चढ़ाते थे गोरखपुर कभी घने जंगलों में विराजमान सुप्रसिद्ध मां तरकुलहा देवी मंदिर आज तीर्थ के रूप में विकसित हो चुका है। हर साल लाखों श्रद्धालु मां का आशीर्वाद पाने के लिए आते हैं। मां भगवती का यह मंदिर कभी स्वतंत्रता संग्राम का भी एक प्रमुख हिस्सा रहा है। गोरखपुर से बीस किलोमीटर दूर देवीपुर गांव में मां तरकुलहा देवी का यह प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। इस मंदिर के महात्म के बारे में लोग बताते हैं कि मन से जो भी मुराद मांगी जाए वह पूरी होती है।
माता के मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। दूर दराज से आए भक्त मां से मन्नतें मांगते हैं। जब पूरी हो जाती है तो यहां मंदिर में घंटी बांधने की परम्परा है। मंदिर परिसर में चारों ओर घंटियां देखने को मिल जाएगी। मन्नतें पूरा होने पर लोग अपनी क्षमता के अनुसार घंटी बांधते हैं।


चैत्र नवरात्रि में लगता है मेला
चैत्र माह में पड़ने वाले नवरात्र में मंदिर परिसर में मेला लगता है। यह मेला रामनवमी के दिन से शुरू होती है और एक महीना तक चलता है। मेला में देश के विभिन्न हिस्सों से लोग आते हैं।
तरकुलहा देवी मंदिर में बकरा चढ़ाने की परम्परा है। लोग मन्न्नतें मांगने आते हैं और पूरी होने के बाद यहां बकरे की बलि चढ़ाते हैं। फिर वहीं मिट्टी के बर्तन में उसे बनाते हैं और प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं। मां अपने भक्तों की रक्षा किसी भी सूरत में करती हैं। आजादी की लड़ाई में भी इस मंदिर का बहुत बड़ा योगदान रहा है। अंग्रेज भारतीयों पर बहुत अत्याचार करते थे। डुमरी रियासत के बाबू बंधू सिंह बहुत बड़े देशभक्त थे। वह अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंके हुए थे। बंधु सिंह मां के भी बहुत बड़े भक्त थे। 1857 के आसपास की बात है। जब पूरे देश में आजादी की पहली हुंकार देश में उठी। गुरिल्ला युद्ध में माहिर बाबू बंधू सिंह भी उसमें शामिल हो गए। वह घने जंगल में अपना ठिकाना बनाए हुए थे। जंगल में घना जंगल था। जंगल से ही गुर्रा नदी गुजरती थी। उसी जंगल में बंधू एक तरकुल के पेड़ के नीचे पिंडियों को बनाकर मां भगवती की पूजा करते थे। अंग्रेजों से गुरिल्ला युद्ध लड़ते और मां के चरणों में उनकी बलि चढ़ाते। इसकी भनक अंग्रेजों को लग गई। उन्होंने अपने गुप्तचर लगाए। अंग्रेजों की चाल कामयाब हुई और एक गद्दार ने बाबू बंधू सिंह के गुरिल्लाा युद्ध और बलि के बारे में जानकारी दे दी। फिर अंग्रेजों ने जाल बिछाकर वीर सेनानी को पकड़ लिया। छह बार टूटा फांसी का फंदा तरकुलहा देवी के भक्त बाबू बंधू सिंह पर अंग्रेजों ने मुकदमा चलाया। अंग्रेज जज ने उनको फंासी की सजा सुनाई। फिर उनको सार्वजनिक रूप से फांसी देने का फैसला लिया गया ताकि कोई फिर बगावत न कर सके। 12 अगस्त 1857 को पूरी तैयारी कर बाबू बंधू सिंह के गले में जल्लाद ने जैसे ही फंदा डालकर लीवर खींचा फंदा टूट गया । छह बार जल्लाद ने फांसी पर उनको चढ़ाया लेकिन हर बार मजबूत से मजबूत फंदा टूटता गया। अंग्रेज परेशान हो गए।
जल्लाद भी पसीनेे पसीने होने लगा। जल्लाद गिड़गिड़ाने लगा कि अगर वह फांसी नहीं दे सका तो उसे अंग्रेज फांसी पर चढ़ा देंगे। इसके बाद बंधू सिंह ने मां तरकुलहा देवी को गुहार लगाई और प्रार्थना कर कहा कि उनको फांसी पर चढ़ जाने दें। उनकी प्रार्थना के बाद सातवीं बार जल्लाद ने जब फांसी पर चढ़ाया तो उनकी फांसी हो सकी। इस घटना के बाद मां तरकुलहा देवी का महात्म दूर दराज तक पहुंचा और धीरे-धीरे भक्तों का रेला वहां पहुंचने लगा। निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक उत्तरी मनोज कुमार अवस्थी एसडीएम चौरी चौरा पवन कुमार क्षेत्राधिकारी चौरी चौरा जगत नारायण कनौजिया सहित अन्य संबंधित मौजूद रहे।तरकुलहा मंदिर का एडीजी जोन ने किया दर्शन सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा* कोरोना प्रोटोकॉल का पूर्ण रूप से किया जाएगा पालन*एक साथ पांच व्यक्ति ही मंदिर में कर सकेंगे प्रवेश कतारों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने वारी का करेंगे प्रतीक्षा* गोरखपुर। जनपद के पूर्वी छोर पर स्थित चौरीचौरा तहसील अंतर्गत मां तरकुलहा मंदिर विराजमान हैं जहां प्रतिदिन हजारों भक्तों मां से आशीर्वाद लेने को आते हैं मंगलवार से प्रारंभ होने वाले चैत्र रामनवमी को देखते हुए गोरखपुर जोन के एडीजी अखिल कुमार मंदिर पहुंचकर मां तरकुलहा देवी का आशीर्वाद प्राप्त कर मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था का अपने सहयोगी पुलिस अधीक्षक उत्तरी मनोज कुमार अवस्थी से प्राप्त करते हुए मंदिर परिसर का जायजा लेते हुए आवश्यक दिशा निर्देश अपने मातहतों को देते हुए एडीजी जोन अखिल कुमार ने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल का पूर्ण रूप से मंदिर परिसर में पालन किया जाएगा एक साथ में केवल 5 व्यक्ति ही मंदिर के अंदर कर पाएंगे प्रवेश जिसका पालन हमारे संबंधित अधिकारी व पुलिस के जवान अपने दायित्वों का निर्वहन करेगे यह सभी व्यवस्था आम जनमानस की सुरक्षा को देखते हुए प्रदेश सरकार ने लागू किया है जिसका अनुपालन कराना हमारा व हमारे कर्मचारियों का उत्तरदायित्व कर्तव्य है आपको बताते चलें कि हर साल रामनवमी से लगता है मेेला, इस देवी मां के मंदिर में आजादी के दीवाने बलि चढ़ाते थे गोरखपुर कभी घने जंगलों में विराजमान सुप्रसिद्ध मां तरकुलहा देवी मंदिर आज तीर्थ के रूप में विकसित हो चुका है। हर साल लाखों श्रद्धालु मां का आशीर्वाद पाने के लिए आते हैं। मां भगवती का यह मंदिर कभी स्वतंत्रता संग्राम का भी एक प्रमुख हिस्सा रहा है। गोरखपुर से बीस किलोमीटर दूर देवीपुर गांव में मां तरकुलहा देवी का यह प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। इस मंदिर के महात्म के बारे में लोग बताते हैं कि मन से जो भी मुराद मांगी जाए वह पूरी होती है। माता के मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। दूर दराज से आए भक्त मां से मन्नतें मांगते हैं। जब पूरी हो जाती है तो यहां मंदिर में घंटी बांधने की परम्परा है। मंदिर परिसर में चारों ओर घंटियां देखने को मिल जाएगी। मन्नतें पूरा होने पर लोग अपनी क्षमता के अनुसार घंटी बांधते हैं। चैत्र नवरात्रि में लगता है मेला चैत्र माह में पड़ने वाले नवरात्र में मंदिर परिसर में मेला लगता है। यह मेला रामनवमी के दिन से शुरू होती है और एक महीना तक चलता है। मेला में देश के विभिन्न हिस्सों से लोग आते हैं। तरकुलहा देवी मंदिर में बकरा चढ़ाने की परम्परा है। लोग मन्न्नतें मांगने आते हैं और पूरी होने के बाद यहां बकरे की बलि चढ़ाते हैं। फिर वहीं मिट्टी के बर्तन में उसे बनाते हैं और प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं। मां अपने भक्तों की रक्षा किसी भी सूरत में करती हैं। आजादी की लड़ाई में भी इस मंदिर का बहुत बड़ा योगदान रहा है। अंग्रेज भारतीयों पर बहुत अत्याचार करते थे। डुमरी रियासत के बाबू बंधू सिंह बहुत बड़े देशभक्त थे। वह अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंके हुए थे। बंधु सिंह मां के भी बहुत बड़े भक्त थे। 1857 के आसपास की बात है। जब पूरे देश में आजादी की पहली हुंकार देश में उठी। गुरिल्ला युद्ध में माहिर बाबू बंधू सिंह भी उसमें शामिल हो गए। वह घने जंगल में अपना ठिकाना बनाए हुए थे। जंगल में घना जंगल था। जंगल से ही गुर्रा नदी गुजरती थी। उसी जंगल में बंधू एक तरकुल के पेड़ के नीचे पिंडियों को बनाकर मां भगवती की पूजा करते थे। अंग्रेजों से गुरिल्ला युद्ध लड़ते और मां के चरणों में उनकी बलि चढ़ाते। इसकी भनक अंग्रेजों को लग गई। उन्होंने अपने गुप्तचर लगाए। अंग्रेजों की चाल कामयाब हुई और एक गद्दार ने बाबू बंधू सिंह के गुरिल्लाा युद्ध और बलि के बारे में जानकारी दे दी। फिर अंग्रेजों ने जाल बिछाकर वीर सेनानी को पकड़ लिया। छह बार टूटा फांसी का फंदा तरकुलहा देवी के भक्त बाबू बंधू सिंह पर अंग्रेजों ने मुकदमा चलाया। अंग्रेज जज ने उनको फंासी की सजा सुनाई। फिर उनको सार्वजनिक रूप से फांसी देने का फैसला लिया गया ताकि कोई फिर बगावत न कर सके। 12 अगस्त 1857 को पूरी तैयारी कर बाबू बंधू सिंह के गले में जल्लाद ने जैसे ही फंदा डालकर लीवर खींचा फंदा टूट गया । छह बार जल्लाद ने फांसी पर उनको चढ़ाया लेकिन हर बार मजबूत से मजबूत फंदा टूटता गया। अंग्रेज परेशान हो गए। जल्लाद भी पसीनेे पसीने होने लगा। जल्लाद गिड़गिड़ाने लगा कि अगर वह फांसी नहीं दे सका तो उसे अंग्रेज फांसी पर चढ़ा देंगे। इसके बाद बंधू सिंह ने मां तरकुलहा देवी को गुहार लगाई और प्रार्थना कर कहा कि उनको फांसी पर चढ़ जाने दें। उनकी प्रार्थना के बाद सातवीं बार जल्लाद ने जब फांसी पर चढ़ाया तो उनकी फांसी हो सकी। इस घटना के बाद मां तरकुलहा देवी का महात्म दूर दराज तक पहुंचा और धीरे-धीरे भक्तों का रेला वहां पहुंचने लगा। निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक उत्तरी मनोज कुमार अवस्थी एसडीएम चौरी चौरा पवन कुमार क्षेत्राधिकारी चौरी चौरा जगत नारायण कनौजिया सहित अन्य संबंधित मौजूद रहे।

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