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Sunday, June 20, 2021
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चैत्र नवरात्र पर ऐसे करें मां को खुश, ऐसे किया जाए मां का पूजन यह है शुभमुहूर्त

मां दुर्गा के 9 स्वरूप
नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. चैत्र नवरात्रि में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि की पूजा का विधान है.

चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से शुरू होकर 22 अप्रैल तक चलेंगे। मां दुर्गा की उपासना के ये नौ दिन हिंदू धर्म के लोगों के लिए बेहद ही खास माने जाते हैं। वैसे तो मां की सवारी शेर है लेकिन नवरात्रि में मां दुर्गा अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आती हैं। ज्योतिष शास्त्र अनुसार मां दुर्गा के वाहनों से ही सुख समृद्धि का पता लगाया जाता है। इस बार नवरात्रि मंगलवार से शुरू हो रही हैं इसलिए माता की सवारी घोड़ा रहेगी।

मां की सवारी का ऐसे चलता है पता: देवी भागवत पुराण में कहे गये एक श्लोक के अनुसार अगर नवरात्र का आरंभ सोमवार या रविवार से होता है तो मां की सवारी हाथी मानी जाती है, शनिवार-मंगलवार को होता है तो मां घोड़े पर सवार होकर आती हैं, गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्र शुरू होते हैं तो माता डोली पर आती हैं, वहीं बुधवार के दिन नवरात्र प्रारंभ होने पर मां का आगमन नाव पर हुआ माना जाता है। इस बार नवरात्रि का आरंभ मंगलवार से हो रहा है इसलिए मां भगवती की सवारी अश्व यानि घोड़ा रहेगी।

घटस्थापना का मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि की पूजा में कलश स्थापना को महत्वपूर्ण माना गया है. कलश यानि घटस्थापना से ही नवरात्रि के व्रत और पूजा आरंभ हो जाती है. नवरात्रि के पहले दिन विधि पूर्वक कलश की स्थापना की जाने की परंपरा है. पंचांग के अनुसार 13 अप्रैल 2021 को घटस्थापना की जाएगी.

घटस्थापना की पूजा सामग्री
नवरात्रि में घटस्थापना को विधि पूर्वक ही स्थापित करना चाहिए तभी नवरात्रि की पूजा का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है. इसके लिए कुछ जरूरी चीजों की अवश्यकता पड़ती है-
चौकी
चौड़े मुख वाला मिट्टी का पात्र
मिट्टी का कलश
सात प्रकार के अनाज
स्वच्छ मिट्टी
जल
गंगाजल
कलावा
आम या अशोक के पत्ते
जटा नारियल
सुपारी
चावल
फूल
फूलों की माला
लाल वस्त्र
मिष्ठान

कलश पूजा विधि
कलश की पूजा विधि पूर्वक करनी चाहिए. इसके लिए मिट्टी के पात्र में सात प्रकार के अनाज को मां दुर्गा का स्मरण करते हुए बोएं. इसके बाद इस पात्र के ऊपर कलश की स्थापना करें. कलश में जल और गंगाजल को मिलाकर भर दें. कलश पर कलावा बांधें. कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रख दें. इसके उपरांत जटा नारियल में कलावा को बांध दें. लाल कपड़े में नारियल को लपेट कर कलश के ऊपर रखें. सभी देवी देवताओं का आह्वान करें.

घटस्थापना का मुहूर्त

घटस्थापना का मुहूर्त 13 अप्रैल को बन रहा है. मंगलवार के दिन सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक घटस्थापना कर सकते हैं.
आचार्य दीपक तेजस्वीमां दुर्गा के 9 स्वरूप नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. चैत्र नवरात्रि में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि की पूजा का विधान है. चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से शुरू होकर 22 अप्रैल तक चलेंगे। मां दुर्गा की उपासना के ये नौ दिन हिंदू धर्म के लोगों के लिए बेहद ही खास माने जाते हैं। वैसे तो मां की सवारी शेर है लेकिन नवरात्रि में मां दुर्गा अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आती हैं। ज्योतिष शास्त्र अनुसार मां दुर्गा के वाहनों से ही सुख समृद्धि का पता लगाया जाता है। इस बार नवरात्रि मंगलवार से शुरू हो रही हैं इसलिए माता की सवारी घोड़ा रहेगी। मां की सवारी का ऐसे चलता है पता: देवी भागवत पुराण में कहे गये एक श्लोक के अनुसार अगर नवरात्र का आरंभ सोमवार या रविवार से होता है तो मां की सवारी हाथी मानी जाती है, शनिवार-मंगलवार को होता है तो मां घोड़े पर सवार होकर आती हैं, गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्र शुरू होते हैं तो माता डोली पर आती हैं, वहीं बुधवार के दिन नवरात्र प्रारंभ होने पर मां का आगमन नाव पर हुआ माना जाता है। इस बार नवरात्रि का आरंभ मंगलवार से हो रहा है इसलिए मां भगवती की सवारी अश्व यानि घोड़ा रहेगी। घटस्थापना का मुहूर्त चैत्र नवरात्रि की पूजा में कलश स्थापना को महत्वपूर्ण माना गया है. कलश यानि घटस्थापना से ही नवरात्रि के व्रत और पूजा आरंभ हो जाती है. नवरात्रि के पहले दिन विधि पूर्वक कलश की स्थापना की जाने की परंपरा है. पंचांग के अनुसार 13 अप्रैल 2021 को घटस्थापना की जाएगी. घटस्थापना की पूजा सामग्री नवरात्रि में घटस्थापना को विधि पूर्वक ही स्थापित करना चाहिए तभी नवरात्रि की पूजा का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है. इसके लिए कुछ जरूरी चीजों की अवश्यकता पड़ती है- चौकी चौड़े मुख वाला मिट्टी का पात्र मिट्टी का कलश सात प्रकार के अनाज स्वच्छ मिट्टी जल गंगाजल कलावा आम या अशोक के पत्ते जटा नारियल सुपारी चावल फूल फूलों की माला लाल वस्त्र मिष्ठान कलश पूजा विधि कलश की पूजा विधि पूर्वक करनी चाहिए. इसके लिए मिट्टी के पात्र में सात प्रकार के अनाज को मां दुर्गा का स्मरण करते हुए बोएं. इसके बाद इस पात्र के ऊपर कलश की स्थापना करें. कलश में जल और गंगाजल को मिलाकर भर दें. कलश पर कलावा बांधें. कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रख दें. इसके उपरांत जटा नारियल में कलावा को बांध दें. लाल कपड़े में नारियल को लपेट कर कलश के ऊपर रखें. सभी देवी देवताओं का आह्वान करें. घटस्थापना का मुहूर्त घटस्थापना का मुहूर्त 13 अप्रैल को बन रहा है. मंगलवार के दिन सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक घटस्थापना कर सकते हैं. आचार्य दीपक तेजस्वी

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