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Friday, June 18, 2021
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बैशाखी, जानें क्यों मनाते हैं यह पर्व?

बैशाखी का पर्व हर वर्ष अप्रैल माह में मनाया जाता है। इसे कृषि पर्व भी कहते हैं क्योंकि पंजाब और हरियाणा में किसान अपने फसलों की कटाई कर लेते हैं और शाम के समय में आग जलाकर उसके चारो ओर एकत्र होते हैं।

बैसाखी देश के उत्तरी भाग यानी पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में प्रमुखता से मनाया जाता है. ये त्योहार सिख नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, इस प्रकार ये पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है. इसे कृषि पर्व भी कहते हैं क्योंकि पंजाब और हरियाणा में किसान अपने फसलों की कटाई कर लेते हैं और शाम के समय में आग जलाकर उसके चारो ओर एकत्र होते हैं। उस आग में नए अन्न डालते हैं।

देश के कई हिस्सों में बैशाखी से ही फसलों की कटाई शुरु होती है। इस वर्ष बैशाखी का पर्व 14 अप्रैल दिन बुधवार को है। इस दिन पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के कई स्थानों पर बैशाखी धूमधाम से मनाई जाती है। इसे सिखों के नववर्ष के रुप में भी मनाया जाता है। जागरण अध्यात्म में आज हम बैशाखी के महत्व के बारे में जानते हैं।

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Baisakhi 2021: बैसाखी के इतिहास, महत्व और शुभ मुहूर्त के बारे में जानिए

बैसाखी एक शुभ त्योहार है जो देश के उत्तरी भाग यानी पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में प्रमुखता से मनाया जाता है. ये त्योहार सिख नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, इस प्रकार ये पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है.

Baisakhi 2021: बैसाखी के इतिहास, महत्व और शुभ मुहूर्त के बारे में जानिए

बैसाखी 2021

बैसाखी एक शुभ त्योहार है जो देश के उत्तरी भाग यानी पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में प्रमुखता से मनाया जाता है. ये त्योहार सिख नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, इस प्रकार ये पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है. हालांकि, इस बार बैसाखी का जश्न थोड़ा अलग दिखाई देगा क्योंकि देश कोरोनोवायरस महामारी की दूसरी लहर की चपेट में आ गया है. इस साल बैसाखी 13 अप्रैल को मनाई जाएगी.

इस त्योहार को वसंत फसल उत्सव के रूप में भी जाना जाता है. इस दिन, लोग सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह को भी श्रद्धांजलि देते हैं. इस दिन को मनाने के लिए, गुरुद्वारों में विशेष लंगर और प्रार्थना का आयोजन किया जाता है. इस साल बैसाखी के लिए पूजा सुबह 8:39 बजे शुरू होगी. इस त्योहार को वैशाख संक्रांति और वैसाखी के रूप में भी जाना जाता है.

बैसाखी का इतिहास

ये दिन खालसा समुदाय की स्थापना का जश्न मनाने के लिए भी चिह्नित है. इस समुदाय का गठन 1699 में गुरु गोबिंद सिंह द्वारा किया गया था. इस दिन के आस-पास घूमने वाली एक और कहानी है, ये कहा जाता है कि इस दिन, गुरु गोबिंद सिंह ने लोगों से गुरु के लिए अपना जीवन बलिदान करने के लिए कहा था. जैसे ही उन्होंने ये कहा, केवल पांच लोग ऐसा करने के लिए आगे आए और बाद में उन्हें सिख समुदाय का पंज पीर बनाया गया.

बैसाखी के दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है. इस त्योहार के मौके पर हरिद्वार और ऋषिकेश में मेला लगता है और लोगों की भीड़ जुटती है.

ज्योतिष के अनुसार, इस दिन सूर्य, मेष राशि में गोचर करते हैं. इसी वजह से इस त्योहार के मेष संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है. बैसाखी पर रबी की फसल की कटाई शुरू होती है जिसकी वजह से इस दिन को सफलता के रूप में मनाया जाता है. इस दिन गेहूं, तिलहन समेत गन्ने आदि फसलों की कटाई भी शुरू कर दी जाती है.

इस दिन, देश के उत्तरी भाग में लोग अपनी फसल भी काटते हैं और वो उन्हें जीवन और भोजन देने के लिए भगवान का धन्यवाद करते हैं.

लोग इस दिन फैंसी ड्रेस पहनकर इस त्योहार को मनाते हैं और वो अपने परिवार के साथ नाचते हैं और खुशियां मनाते हैं. लोग इस दिन कड़ा प्रसाद का भी भोग लगाते हैं जो आटे और घी के साथ बनाया जाता है और इसे सभी को परोसा जाता है.

बैशाखी का महत्व

1. सिखों के 10वें गुरु गोविन्द सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को बैशाखी के दिन ही खालसा पंथ की स्थापना की थी। खालसा पंथ का उद्देश्य धर्म की रक्षा करना और समाज की भलाई करना है। इस वजह से सिखों के लिए बैशाखी का विशेष महत्व होता है। खलसा पंथ की स्थापना श्री केसरगढ़ साहिब आनंदपुर में हुआ था, इसलिए बैशाखी के दिन यहां पर विशेष उत्सव मनाया जाता है।

2. पंजाब और हरियाणा में किसान अपनी फसल काट लेते हैं। फिर बैशाखी के दिन एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। नए कपड़े पहनते हैं और उत्सव मनाते हैं। शाम को आग जलाकर उसके चारो ओर खड़े होते हैं। वहां पर भांगड़ा और गिद्दा करते हैं।

3. बैशाखी को मेष संक्रांति भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं। मेष राशि में प्रवेश करने से सूर्य का 12 राशियों पर अच्छा या बुरा प्रभाव भी पड़ता है।

4. बंगाल में भी बैशाखी की अपना ही महत्व होता है क्योंकि बैशाखी बंगाली कैलेंडर का पहला दिन माना जाता है। इस दिन लोग उत्सव मनाते हैं और मांगलिक कार्य करते हैं। यह दिन शुभ माना जाता है।

5. असम में बैशाखी के दिन बिहू पर्व का उत्सव मनाया जाता है।

6. बैशाखी के दिन ही नवसंवत् की शुरुआत होती है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को नया संवत् प्रारंभ होता है। इसे हिन्दू नववर्ष का पहला दिन कहते हैं।

7. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी।

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