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Friday, September 17, 2021
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चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव को मिली जमानत. कोर्ट ने रखी शर्त- पता और मोबाइल नंबर नहीं बदल सकेंगे

चारा घोटाला के दुमका कोषागार से अवैध निकासी के मामले में रांची की जेल में सजा काट रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को आज झारखंड हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है.

रांची. चारा घोटाला से जुड़े मामलों में एक साल से ज्यादा समय से जेल की सजा काट रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को आज झारखंड हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है. दुमका कोषागार से गबन के मामले को लेकर इससे पहले भी लालू की जमानत पर कई बार सुनवाई हो चुकी है. चारा घोटाले के इस मामले में दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपए की अवैध निकासी के केस में हाईकोर्ट ने लालू यादव को जमानत दी है. आरजेडी प्रमुख के वकील देवर्षि मंडल के मुताबिक कोरोना संक्रमण की खबरों के बीच लालू के जमानत मामले की वर्चुअल सुनवाई होगी.

झारखंड हाईकोर्ट में जस्टिस अपरेश सिंह की अदालत ने दुमका कोषागार मामले में सुनवाई को बाद आरजेडी प्रमुख को जमानत देने का फैसला सुनाया. अदालत में केस नंबर आरसी 38 मामले की आज सुनवाई हुई. दुमका कोषागार से 3 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध निकासी मामले से पहले लालू यादव को चाईबासा और देवघर मामलों में पहले ही जमानत दी जा चुकी है. आपको बता दें कि दुमका कोषागार से अवैध निकासी के मामले में लालू यादव की जमानत याचिका पर इससे पहले भी कई सुनवाई हो चुकी है, लेकिन उन्हें कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल पाई थी.

हाईकोर्ट ने कहा है कि जमानत के दौरान लालू प्रसाद यादव देश से बाहर नहीं जाएंगे। देश से बाहर जाने से पहले उन्हें कोर्ट से परमिशन लेनी होगी। इसके साथ ही अपना मोबाइल नंबर और अपना पता नहीं बदलेंगे। लालू को ये जमानत दुमका ट्रेजरी मामले में आधी सजा पूरी होने के बाद दी गई है। इससे पहले लालू यादव को अक्टूबर 2020 में चाईबासा ट्रेजरी मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन दुमका ट्रेजरी केस की वजह से उनकी रिहाई नहीं हुई थी।

चारा घोटाले के इन मामलों में लालू यादव को सुनाई गई है सजा

पहला मामला
चाईबासा ट्रेजरी केस
37.7 करोड़ रुपए अवैध निकासी का आरोप
लालू प्रसाद समेत 44 अभियुक्त
मामले में 5 साल की सजा

दूसरा मामला
देवघर ट्रेजरी
84.53 लाख रुपए की अवैध निकासी का आरोप
लालू समेत 38 पर केस
लालू प्रसाद को साढ़े तीन साल की सजा

तीसरा मामला
चाईबासा ट्रेजरी
33.67 करोड़ रुपए की अवैध निकासी का आरोप
लालू प्रसाद समेत 56 आरोपी
5 साल की सजा

चौथा मामला
दुमका ट्रेजरी
3.13 करोड़ रुपए की अवैध निकासी का मामला
दो अलग-अलग धाराओं में 7-7 साल की सजा

चारा घोटाले में कब-क्या हुआ?
27 जनवरी 1996: पशुओं के चारा घोटाले के रूप में सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की लूट का पता चला। चाईबासा ट्रेजरी से गलत तरीके से 37.6 करोड़ रुपए निकाले गए थे।
11 मार्च 1996: पटना हाईकोर्ट ने चारा घोटाले की जांच के लिए CBI को निर्देश दिए।
19 मार्च 1996: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश की पुष्टि करते हुए हाईकोर्ट की बेंच को निगरानी करने को कहा।
27 जुलाई 1997: CBI ने लालू प्रसाद यादव पर शिकंजा कसा।
30 जुलाई 1997: लालू प्रसाद ने CBI अदालत के सामने सरेंडर किया।
19 अगस्त 1998: लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की आय से अधिक की सम्पत्ति का मामला दर्ज कराया गया।
4 अप्रैल 2000: लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप पत्र दर्ज हुआ और राबड़ी देवी को सह-आरोपी बनाया गया।
5 अप्रैल 2000: लालू प्रसाद और राबड़ी देवी का समर्पण, राबड़ी देवी को मिली जमानत।
9 जून 2000: अदालत में लालू प्रसाद के खिलाफ आरोप तय किये।
अक्टूबर 2001: सुप्रीम कोर्ट ने झारखण्ड के अलग राज्य बनने के बाद मामले को नये राज्य में ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद लालू ने झारखण्ड में आत्मसमर्पण किया।
18 दिसम्बर 2006: लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में क्लीन चिट दी।
2000 से 2012 तक: मामले में करीब 350 लोगों की गवाही हुई। इस दौरान मामले के कई गवाहों की भी मौत हो गयी।
17 मई 2012: सीबीआई की विशेष अदालत में लालू यादव पर इस मामले में कुछ नये आरोप तय किये। इसमें दिसम्बर 1995 और जनवरी 1996 के बीच दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी पूर्ण निकासी भी शामिल है।
17 सितम्बर 2013: चारा घोटाला मामले में रांची की विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा।
30 सितम्बर 2013: चारा घोटाला मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव दोषी करार।

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