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Friday, September 24, 2021
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जिसके स्मरण मात्र से कट जाते है बड़े से बड़े कष्ट,हो जाता है सभी दुखों का नष्ट, नही कर सकता कोई शत्रु आपका आनिष्ट आज है उस शक्तियों की देवी मां बगलामुखी जी का जन्मदिन

वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है. मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या माना गया है. इनकी पूजा करने से गंभीर बीमारियां दूर होती हैं और शत्रुओं का नाश होता है. इसके अलावा व्यक्ति को वाक सिद्धि और वाद-विवाद में विजय प्राप्ति होती हैं और तरह की बाधा से मुक्ति मिलती है.

मां बगलामुखी को पीली चीजें अतिप्रिय हैं, इसलिए उनकी पूजा के दौरान ज्यादा से ज्यादा पीली वस्तुओं को अर्पित किया जाता है और उन्हें पीतांबरा माता के नाम से भी जाना जाता है. इस बार बगलामुखी जयंती गुरुवार 20 मई को पड़ रही है. यहां जानिए जीवन के बड़े-बड़े कष्टों को हरने वाली माता की पूजा विधि, मंत्र, चालीसा और आरती.

मां बगलामुखी की पूजा में नियमों का ध्यान रखें
शास्त्रों के अनुसार मां बगलामुखी को 10 महाविद्याओं में से एक माना गया है. ये 10 महाविद्याओं के क्रम में 8वीं महाविद्या है. परंपरा के अनुसार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी की जयंती मनाई जाती है. इसी तिथि को मां बगलामुखी अवतरित हुई थीं. अष्टमी तिथि पर मां बगलामुखी की विधि पूर्वक पूजा अर्चना की जाती है. वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी मां बगलामुखी को समर्पित है. इस दिन नियमों का कठोरता से पालन करना चाहिए. क्यों मां को अनुशासन और नियम अधिक पसंद हैं, इसलिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  • स्वच्छता को अपनाएं.
  • व्रत के नियमों का पालन करें.
  • प्रात: स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेकर पूजा आरंभ करनी चाहिए.
  • नशा आदि से दूर रहना चाहिए.
  • वाणी को दूषित न करें.
  • क्रोध न करें.
  • अहंकार भूलकर भी न करें.
  • किसी का अपमान न करें.
  • दान आदि का कार्य करना चाहिए.

शत्रु, रोग और संकटों से मुक्ति मिलती है
मां बगलामुखी की पूजा हर प्रकार की बाधा और कष्ट को दूर करती है. मां बगलामुखी की पूजा उस स्थिति में अधिक लाभकारी मानी गई है जब व्यक्ति किसी गंभीर परेशानी में जकड़ा हो. गंभीर परेशानी होने पर मां की भक्तिभाव के साथ पूजा करने से राहत मिलती है और बाधा दूर होती है.

मां बगलामुखी जयंती शुभ मुहूर्त
बगलामुखी जयंती तिथि: 20 मई 2021
पूजा का शुभ समय: सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक.
पूजा की कुल अवधि: 55 मिनट.वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है. मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या माना गया है. इनकी पूजा करने से गंभीर बीमारियां दूर होती हैं और शत्रुओं का नाश होता है. इसके अलावा व्यक्ति को वाक सिद्धि और वाद-विवाद में विजय प्राप्ति होती हैं और तरह की बाधा से मुक्ति मिलती है. मां बगलामुखी को पीली चीजें अतिप्रिय हैं, इसलिए उनकी पूजा के दौरान ज्यादा से ज्यादा पीली वस्तुओं को अर्पित किया जाता है और उन्हें पीतांबरा माता के नाम से भी जाना जाता है. इस बार बगलामुखी जयंती गुरुवार 20 मई को पड़ रही है. यहां जानिए जीवन के बड़े-बड़े कष्टों को हरने वाली माता की पूजा विधि, मंत्र, चालीसा और आरती. मां बगलामुखी की पूजा में नियमों का ध्यान रखें शास्त्रों के अनुसार मां बगलामुखी को 10 महाविद्याओं में से एक माना गया है. ये 10 महाविद्याओं के क्रम में 8वीं महाविद्या है. परंपरा के अनुसार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी की जयंती मनाई जाती है. इसी तिथि को मां बगलामुखी अवतरित हुई थीं. अष्टमी तिथि पर मां बगलामुखी की विधि पूर्वक पूजा अर्चना की जाती है. वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी मां बगलामुखी को समर्पित है. इस दिन नियमों का कठोरता से पालन करना चाहिए. क्यों मां को अनुशासन और नियम अधिक पसंद हैं, इसलिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए- – स्वच्छता को अपनाएं. – व्रत के नियमों का पालन करें. – प्रात: स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेकर पूजा आरंभ करनी चाहिए. – नशा आदि से दूर रहना चाहिए. – वाणी को दूषित न करें. – क्रोध न करें. – अहंकार भूलकर भी न करें. – किसी का अपमान न करें. – दान आदि का कार्य करना चाहिए. शत्रु, रोग और संकटों से मुक्ति मिलती है मां बगलामुखी की पूजा हर प्रकार की बाधा और कष्ट को दूर करती है. मां बगलामुखी की पूजा उस स्थिति में अधिक लाभकारी मानी गई है जब व्यक्ति किसी गंभीर परेशानी में जकड़ा हो. गंभीर परेशानी होने पर मां की भक्तिभाव के साथ पूजा करने से राहत मिलती है और बाधा दूर होती है. मां बगलामुखी जयंती शुभ मुहूर्त बगलामुखी जयंती तिथि: 20 मई 2021 पूजा का शुभ समय: सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक. पूजा की कुल अवधि: 55 मिनट.

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