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Thursday, October 21, 2021
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वटमावस पर सुहागिनों ने की अपने पति की लंबी उम्र की कामना

आज बड़मावस है, जिसको लेकर सुहागिन महिलाओं में एक अलग उत्साह देखने को मिला। आज के दिन वट वृक्ष की पूजा की जाती है.

आज का दिन सुहागिनों के लिए बहुत ही खास होता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए आज का पूजा रखती है। मान्यता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण आज के दिन ही यमराज से बचाए थे और वह वट वृक्ष के नीचे रहे थे । इसी को लेकर आज के दिन वट वृक्ष की पूजा की जाती है।वट वृक्ष के नीचे खरबूजा और आम जैसे फल भेंट किये जाते है। दीपक, ज्योति के साथ आरती की जाती है और वट वृक्ष के चारो तरफ घूमकर चक्कर लगाते हुए कलावा बांधा जाता है।ग्रेटर नोएडा में ड भी महिलाओं ने कुछ इसी तरह से पूजा की और वटवृक्ष के सामने अपने पति की लंबी उम्र की।

पूजा करने आई महिलाओं ने बताया कि आज का दिन सुहागिनों के लिए बहुत ही खास होता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए आज का पूजा रखती है। मान्यता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण आज के दिन ही यमराज से बचाए थे और वह वट वृक्ष के नीचे रहे थे । इसी को लेकर आज के दिन वट वृक्ष की पूजा की जाती है।वट वृक्ष के नीचे खरबूजा और आम जैसे फल भेंट किये जाते है। दीपक, ज्योति के साथ आरती की जाती है और वट वृक्ष के चारो तरफ घूमकर चक्कर लगाते हुए कलावा बांधा जाता है।

पुराणों में वर्णित सावित्री की कथा इस प्रकार है- राजर्षि अश्वपति की एकमात्र संतान थीं सावित्री। सावित्री ने वनवासी राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को पति रूप में चुना। लेकिन जब नारद जी ने उन्हें बताया कि सत्यवान अल्पायु हैं, तो भी सावित्री अपने निर्णय से डिगी नहीं। वह समस्त राजवैभव कत्याग कर सत्यवान के साथ उनके परिवार की सेवा करते हुए वन में रहने लगीं। जिस दिन सत्यवान के महाप्रयाण का दिन था, उस दिन वह लकड़ियां काटने जंगल गए। वहां मू्च्छिछत होकर गिर पड़े। उसी समय यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए। तीन दिन से उपवास में रह रही सावित्री उस घड़ी को जानती थीं, अत: बिना विकल हुए उन्होंने यमराज से सत्यवान के प्राण न लेने की प्रार्थना की। लेकिन यमराज नहीं माने। तब सावित्री उनके पीछे-पीछे ही जाने लगीं। कई बार मना करने पर भी वह नहीं मानीं, तो सावित्री के साहस और त्याग से यमराज प्रसन्न हुए और कोई तीन वरदान मांगने को कहा। सावित्री ने सत्यवान के दृष्टिहीन माता-पिता के नेत्रों की ज्योति मांगी, उनका छिना हुआ राज्य मांगा और अपने लिए 100 पुत्रों का वरदान मांगा। तथास्तु कहने के बाद यमराज समझ गए कि सावित्री के पति को साथ ले जाना अब संभव नहीं। इसलिए उन्होंने सावित्री को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दिया और सत्यवान को छोड़कर वहां से अंतर्धान हो गए। उस समय सावित्री अपने पति को लेकर वट वृक्ष के नीचे ही बैठी थीं। इसीलिए इस दिन महिलाएं अपने परिवार और जीवनसाथी की दीर्घायु की कामना करते हुए वट वृक्ष को भोग अर्पण करती हैं, उस पर धागा लपेट कर पूजा करती हैं।

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