23.7 C
Meerut
Saturday, October 16, 2021
Home धर्म Nirjala Ekadashi 2021: आज निर्जला एकादशी के दिन इन मुहूर्त में भूलकर...

Nirjala Ekadashi 2021: आज निर्जला एकादशी के दिन इन मुहूर्त में भूलकर भी न करें भगवान विष्णु की पूजा, जानिए व्रत नियम

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है. निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाती है. इस दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को बिना पानी पिएं रहना होता है. इस साल निर्जला एकादशी 21 जून को मनाई जाएगी

निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल की इस एकादशी का व्रत भीम ने भी रखा था. इस व्रत के महामात्य के बारे में महर्षि व्यास ने भीम को बताया था. भीम ने इस व्रत को विधि पूर्वक किया था. इस कारण इस एकादशी का भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है.

बन रहा है सिद्धि योग

निर्दला एकादशी इस साल सोमवार के दिन पड़ रही है ऐसे में इस दिन शिव और सिद्धि योग बन रहा है जिस कारण इस एकादशी का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है. 21 जून को शाम 5:34 मिनट तक शिव योग रहेगा और इसके बाद सिद्धि योग आरंभ हो जाएगा. सिद्धि योग में व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं. इस दौरान में किया गया प्रत्येक कार्य सफल होता है. शिव योग को भी बहुत शुभ कहा जाता है ओैर इस दौरान किए गए धार्मिक अनुष्ठान, पूजापाठ या दान आदि का भी शुभ परिणाम मिलता है.

एकादशी के दिन क्या करें

वैसे तो इस व्रत में एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक निर्जल रह कर व्रत करने का विधान है पर जो लोग कमजोर या फिर बीमार रहते हैं वह जल पीकर और एक बार फलहार कर सकते हैं।

★इस एकादशी को श्री हरि को प्रिय तुलसी की मंजरी तथा पीला चन्दन,रोली,अक्षत,पीले पुष्प,ऋतु फल एवं धूप-दीप,मिश्री आदि से भगवान दामोदर का भक्ति-भाव से पूजन करना चाहिए।इस दिन तुलसी के पत्र नहीं तोड़ने चाहिए,शास्त्रों में ऐसा करना वर्जित बताया गया है।  

एकादशी के दिन गीता पाठ,विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ व ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करने से प्राणी पापमुक्त-कर्जमुक्त होकर विष्णुजी की कृपा पाता है।

एकादशी के दिन क्या करें

वैसे तो इस व्रत में एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक निर्जल रह कर व्रत करने का विधान है पर जो लोग कमजोर या फिर बीमार रहते हैं वह जल पीकर और एक बार फलहार कर सकते हैं।

इस एकादशी को श्री हरि को प्रिय तुलसी की मंजरी तथा पीला चन्दन,रोली,अक्षत,पीले पुष्प,ऋतु फल एवं धूप-दीप,मिश्री आदि से भगवान दामोदर का भक्ति-भाव से पूजन करना चाहिए।इस दिन तुलसी के पत्र नहीं तोड़ने चाहिए,शास्त्रों में ऐसा करना वर्जित बताया गया है।  

एकादशी के दिन गीता पाठ,विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ व ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करने से प्राणी पापमुक्त-कर्जमुक्त होकर विष्णुजी की कृपा पाता है।

★वैसे तो इस व्रत में एकादशी के सूर्योदय से द्वाइस तिथि पर लहसुन, प्याज, मांस, मछली, अंडा आदि तामसिक आहार के सेवन से भी दूर रहना चाहिए एवं दिन में नहीं सोना चाहिए।

दशी तिथि के सूर्योदय तक निर्जल रह कर व्रत करने का विधान है पर जो लोग कमजोर या फिर बीमार रहते हैं वह जल पीकर और एक बार फलहार कर सकते हैं।

★एकादशी के दिन गीता पाठ,विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ व ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करने से प्राणी पापमुक्त-कर्जमुक्त होकर विष्णुजी की कृपा पाता है।

★रात्रि के समय भगवान नारायण की प्रसन्नता के लिए नृत्य,भजन-कीर्तन और स्तुति के द्वारा जागरण करना चाहिए। जागरण करने वाले को जिस फल की प्राप्ति होती है,वह हज़ारों वर्ष तपस्या करने से भी नहीं मिलता।

★व्रत की सिद्धि के लिए भगवान विष्णु के समक्ष घी का अखंड दीपक जलाएं ,एवं दीपदान करना शुभ माना गया है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए इस दिन आसमान के नीचे सांयकाल घरों, मंदिरों, पीपल के वृक्षों तथा तुलसी के पौधों के पास दीप प्रज्वलित करने चाहिए। गंगा आदि पवित्र नदियों में दीप दान करना चाहिए।

★यह व्रत ज्येष्ठ मास में पड़ने के कारण इस दिन गर्मी से राहत देने वाली शीतल वस्तुओं का दान करना चाहिए। इस दिन गोदान,वस्त्रदान, छत्र, जूता, फल आदि का दान करना बहुत ही लाभकारी होता है।

निर्जला एकादशी व्रत कथा, निर्जला एकादशी की कहानी, Nirajala ekadashi vrat katha in hindi

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पांडू परिवार एकादशी व्रत श्रद्धा-भाव से करते थे, मगर भीमसेन व्रत करने में असमर्थ रहते थे। इसकी वजह यह थी की वह एक समय का खाना भी खाए बिना नहीं रह पाते थे। अपने भाईयों को व्रत करता देख उनका भी व्रत करने का मन करता था लेकिन वह मजबूर थे। वह भगवान विष्णु का निरादर नहीं करना चाहते थे इसलिए एक बार उन्होंने अपनी व्यथा महर्षि व्यास जी को बताई और इस समस्या का हल पूछा। वेदव्यास जी ने उनकी चिंता दूर करते हुए निर्जला एकादशी व्रत का महत्व बताया और कहा कि इस व्रत के नियम बेहद कठिन हैं मगर जो यह व्रत करता है उसे समस्त एकादशियों का फल मिलता है तथा उसके सारे पाप मिट जाते हैं। यह एकादशी वृषभ और मिथुन संक्रांति के बीच में पड़ती है और इस दिन अन्न और जल ग्रहण नहीं किया जाता है। वेदव्यास जी के कहने पर महाबली भीमसेन भी इस व्रत को करने लगे, इसीलिए इस एकादशी को भीमसेन एकादशी या भीम एकादशी भी कहा जाता है।

एकादशी के दिन क्या न करें

इस एकादशी को श्री हरि को प्रिय तुलसी की मंजरी तथा पीला चन्दन,रोली,अक्षत,पीले पुष्प,ऋतु फल एवं धूप-दीप,मिश्री आदि से भगवान दामोदर का भक्ति-भाव से पूजन करना चाहिए।इस दिन तुलसी के पत्र नहीं तोड़ने चाहिए,शास्त्रों में ऐसा करना वर्जित बताया गया है।  

★पौराणिक मान्यता के अनुसार एकादशी में ब्रह्महत्या सहित समस्त पापों का शमन करने की शक्ति होती है,इस दिन मन,कर्म,वचन द्वारा किसी भी प्रकार का पाप कर्म करने से बचने का प्रयास करना चाहिए।

★इस दिन व्रती किसी की बुराई या चुगली न करें। माता पिता, गुरु या अन्य किसी का दिल न दुखाएं और न ही किसी  का अपमान करें।

★एकादशी के दिन चावल नहीं खाने चाहिए ।जो लोग एकादशी का व्रत नहीं करते उन्हें भी चावल नहीं खाना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस तिथि को इनको जीव रूप मानते हुए एकादशी को भोजन के रूप में ग्रहण करने से परहेज किया गया है ,ताकि सात्विक रूप से विष्णु प्रिया एकादशी का व्रत संपन्न  हो सके ।

★इस तिथि पर लहसुन, प्याज, मांस, मछली, अंडा आदि तामसिक आहार के सेवन से भी दूर रहना चाहिए एवं दिन में नहीं सोना चाहिए।

★इस दिन व्रती किसी की बुराई या चुगली न करें। माता पिता, गुरु या अन्य किसी का दिल न दुखाएं और न ही किसी  का अपमान करें।

★एकादशी के दिन चावल नहीं खाने चाहिए ।जो लोग एकादशी का व्रत नहीं करते उन्हें भी चावल नहीं खाना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस तिथि को इनको जीव रूप मानते हुए एकादशी को भोजन के रूप में ग्रहण करने से परहेज किया गया है ,ताकि सात्विक रूप से विष्णु प्रिया एकादशी का व्रत संपन्न  हो सके ।

आचार्य दीपक तेजस्वी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

तीसरे मोर्चे के गठन को लेकर ओम प्रकाश चौटाला ने एचडी देवगौड़ा एवं मुलायम सिंह यादव से की मुलाकात

इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला ने पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा एवं उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से की मुलाकात

BJP के खिलाफ कांग्रेस का गद्दी छोड़ो अभियान, प्रदेश अध्यक्ष लल्लू ने कहा- ट्रस्ट के साथ मिलकर सरकार ने अयोध्या में की चंदा चोरी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले प्रदर्शन और नारेबाजी का दौर शुरू हो गया है। खुद को फिर देश के सबसे...

त्रिपुरा में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य की सत्तारूढ़ भाजपा को हराने के लिए तृणमूल कांग्रेस ने जोर लगाना शुरू कर दिया...

त्रिपुरा में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य की सत्तारूढ़ भाजपा को हराने के लिए तृणमूल कांग्रेस ने जोर लगाना शुरू...

धनबाद जज हत्या मामला, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मामले को मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया।

धनबाद एडिशनल सेशन जज की कथित हत्या का मामला। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मामले को मॉनिटरिंग...

Recent Comments